यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
चोट गहरी है।
ReplyDeleteरीता रहा मन ! जीवन बीता इस तरह !
ReplyDeleteजिस तरह शिद्ध हिंदी और उर्दू हर्फ़ के लाजवाब अंदाज पर आपने ये ग़ज़ल तामीर करी है। .......... ये यकीन है हमको की आप जैसे कलमदान ही इस मुल्क के हिन्दू-मुस्लिम एकता के असल नुमाइंदे है।
ReplyDeleteसलाम आपको।