कोप

शरीक हुए थे जो कल के  कवि सम्मेलन में, वो सब के सब, एक ही थाली के चट्टे-बट्टे थे, एक से बढ़के एक पैदाइशी चमचे, तलवेचाट, बस,यही कहूंगा कि सबक...