...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Straight!
Don't be confused, among peace, harmony or war, conflict, chaos, one among them you have to choose, two things are only available r...
-
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
-
तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
-
नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...

बिन बदरा पानी गिरे, बदरा पानी सून,
ReplyDeleteजब तोरी आँखें नमें, बीता जाये जून।
मानसून माने नहीं, कभी चीन तूफ़ान ।
ReplyDeleteउच्च-दाब का क्षेत्र भी, कर देता हैरान ।
कर देता हैरान , नेह बरसाऊँ कैसे ।
लेती मन में ठान, किन्तु मैं आऊँ कैसे ।
बिन जंगल उद्यान, नहीं मेरा मन लागे ।
खड़े पास शैतान, नहीं तो आऊँ आगे ।
हाय हाय ये मजबूरी ---
ReplyDeleteसूखा सावन -- जैसे ड्राई डेज ! :)
भाई जी,
ReplyDeleteकवि गोष्ठी मुबारक हो :-))
शुक्र है ओले/पाला नहीं पड़ता..
ReplyDelete:-)
सादर
अनु
:):) मौसम विभाग पर बढ़िया कटाक्ष ...
ReplyDeleteमेरे प्रति तुम्हारा प्यार,
ReplyDeleteभारत के मौसम विभाग से
ख़ास भिन्न नहीं !
Kyaa baat hai ;)
बहुत अच्छी प्रस्तुति!
ReplyDeleteइस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
मुखर अभिव्यक्ति .... प्रशंसनीय है ....
ReplyDeleteबहुत सुंदर !!
ReplyDeleteअमेरिका के मौसम विभाग
का साफ्टवेयर डलवा लीजिये
जब जैसा मौसम चाहे
उनके मूड में डलवा लीजिये !!
bahut badhiya ........
ReplyDeleteतुम...हारे.....! ...... तुम... हारी........ !!
ReplyDeleteऔर मैं हूँ कि
न उन्हें झूठा करार पाता हूँ
और न सच मानने को तैयार,
क्योंकि मैं जानता हूँ कि
मेरे प्रति तुम्हारा प्यार,
भारत के मौसम विभाग से
ख़ास भिन्न नहीं !... बहुत ही बढ़िया
जब बरसने की उम्मीद जताता है,
ReplyDeleteतब पड़ती है सूखे की मार !!
और जब करता है,
शुष्क मौसम की भविष्यवाणी ,
तब कम्वख्त मुसलाधार !!!
सुंदर प्रस्तुति !!
उनका प्यार भी मौसम विभाग का शिकार हो गया ... भई बहुत खूब ...
ReplyDeleteतुम...हारे.....! ...... तुम... हारी........ !!
ReplyDeleteऔर मैं हूँ कि
न उन्हें झूठा करार पाता हूँ
और न सच मानने को तैयार,
वाह ... बेहतरीन भाव