इस मुल्क की तहज़ीब-ए-वीआईपी - १
इस मुल्क की तहज़ीब-ए-वीआईपी - १ यह एक सर्वविदित सत्य है कि तीन लम्बी गुलामियत का दंश झेल चुका इस मुल्क का वह प्राणी जो सुबह से शाम तक का अपना वक्त सिर्फ अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के जुगाड़ में ही व्यतीत कर देता है, उसके दिल में जाति, धर्म और सम्प्रदाय से परे, एक ख़ास किस्म का मक्कार वर्ग, अपने द्वारा पैदा की गई एक ख़ास किस्म की दहशत की पैठ बनाने में हमेशा सक्षम रहा है। इसी का नतीजा था कि पड़ोसी मुल्क के कुछ दहशगर्द बेख़ौफ़ एक नीली बत्ती लगी गाड़ी के माध्यम से पठानकोट के वायुसेना बेस में घुस गए और हमारे १० वीर जवानो को अपने प्राणो की आहुति देनी पड़ी। अब सवाल यह उठता है कि आम जनता को बड़ी-बड़ी नसीहतें देने वाला यह वर्ग-ए-तहज़ीब-ए-वीआईपी, क्या खुद अपने लिए यह नियम बनाएगा कि आज के बाद से हर वीआईपी वाहन को उसके मार्ग में पड़ने वाले किसी भी सुरक्षा चेक-पोस्ट पर चेकिंग करवाना अनिवार्य होगा और ऐसा न करने पर सुरक्षा चेक-पोस्ट पर तैनात सुरक्षा-कर्मी को उसके उल्लंघन कर्ता चालक को देखते ही गोली मारने क...