तुझसे क्या कहू?
साथ ही
इक 'नाक' शर्म से भी जुडी रहती है।
अर्थात,
हर किसी की किंचित 'हद' तय है।
मगर
अरे वो बेख़ौफ़,बेदर्दी और वेशर्म !
अब
उससे क्या कहें जिसकी 'नाक' ही नहीं।
इक 'नाक' शर्म से भी जुडी रहती है।
अर्थात,
हर किसी की किंचित 'हद' तय है।
मगर
अरे वो बेख़ौफ़,बेदर्दी और वेशर्म !
अब
उससे क्या कहें जिसकी 'नाक' ही नहीं।
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