Tuesday, November 12, 2019

पहेलियां जीवन की।



उत्कर्ष और अप्कर्ष,
कहीं विसाद,कहीं हर्ष,
अस्त होता आफताब,
उदय होता माहताब,
बहुत ही लाजवाब।

कैंसी मौनावलंबी 
ये इंसानी हयात ,
जिस्मानी मुकाम,
उद्गम जिसका आब,
और चरम इसका 
शबाब और शराब।

अंततोगत्वा जिन्दगी
बस, इक अधूरा ख्वाब।
अस्त होता आफताब,
उदय होता माहताब,
बहुत ही लाजवाब।।


4 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
    iwillrocknow.com

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  2. बहुत ही लाज़वाब
    बहुत ही लाज़वाब।

    वाह... वाह।
    ऐसी रचना बहुत दिनों बाद पढ़ी है।
    कुछ पंक्तियां आपकी नज़र 👉👉 ख़ाका 

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  3. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में रविवार 17 नवम्बर 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. हर दिन एक नई सुबह होती जरूर है लेकिन सबके लिए एक सा नहीं
    बहुत सुन्दर

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पहेलियां जीवन की।

उत्कर्ष और अप्कर्ष, कहीं विसाद,कहीं हर्ष, अस्त होता आफताब, उदय होता माहताब, बहुत ही लाजवाब। कैंसी मौनावलंबी  ये इंसानी हयात , ...