Wednesday, August 12, 2020

अभी जाना तो नहीं चाहते थे वे इस दौर से, राहत न मिली तो जाना पडा इंदौर से।

भांति-भांंति के हुरी ख्वा़ब, 

मन मे लेकर इंदौर से 

झूमते हुए निकले थे जो कल,

जन्नत फुल होने की वजह से,

सुना है, उन्हें खुदा के  किसी

'राहत' कैंप मे ठहराया गया है,बल ।

2 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

श्रद्धांजलि ।

Wednesday, 12 August, 2020  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

विनम्र श्रद्धांजलि।

Wednesday, 12 August, 2020  

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