अभी जाना तो नहीं चाहते थे वे इस दौर से, राहत न मिली तो जाना पडा इंदौर से।
भांति-भांंति के हुरी ख्वा़ब,
मन मे लेकर इंदौर से
झूमते हुए निकले थे जो कल,
जन्नत फुल होने की वजह से,
सुना है, उन्हें खुदा के किसी
'राहत' कैंप मे ठहराया गया है,बल ।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
2 Comments:
श्रद्धांजलि ।
विनम्र श्रद्धांजलि।
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