अथाह उदारिता !



कुछ 'परदेशी' और 
कुछ 'जयचंदी' गिद्ध,
जो पहले ही प्रदूषित कर चुके थे 
परिवेश को,
जहर पिलाने की फिराक मे हैं, 
इस देश को।
सम्भल जाओ
ऐ, रहम दिल मातरे वतन,
वरना मुश्किल होगा 
बर्दाश्त कर पाना ऐंसी ठेस को।।

चित्र विकिपीडिया से साभार।

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