चुनौती..

हिम्मत है तुझमें तो तू निकल के दिखा, 

मुख से, पेट से, दांतों या फिर आंखों से,

ऐ मेरे दर्द, अब तू बच नहीं सकता, क्योंकि

मैने तुझे बांध दिया है, जिंदगी की सलाखों से।

Comments

  1. आदरणीय विकास जी, उत्कृष्ट अभिव्यक्ति! साधुवाद!--ब्रजेन्द्रनाथ

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

यूं भी बावफा होते है लोग !

धार्मिक भावनाएं क्या हुई, कोई छुई-मुई हो गई !

मुस्लिम बुद्धिजीवियों से सिर्फ एक सवाल !