Friday, November 6, 2020

इतना न इतराओ...

जब हम न होंगे, 

मायूस तो तुम अवश्य होंगी 

हमें खोकर ।

जीवन मे पग-पग,

बिंदास हमें लगने वाली ऐ, 

हर एक ठोकर ।।

2 comments:

समाप्त होता अध्याय ....

बिन पिए और बिना कुछ कहे, आज वो चुपचाप सो गया है, लगता है जिंदगी का खज़ाना 'परचेत', अब खत्म हो गया है।