जब हम न होंगे,
मायूस तो तुम अवश्य होंगी
हमें खोकर ।
जीवन मे पग-पग,
बिंदास हमें लगने वाली ऐ,
हर एक ठोकर ।।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
कजरारी जुल्फ़ों और गलमुच्छों का रंग कब धवल हुआ 'परचेत', कुछ पता ही न चला, बस, साज़ और सामान जुटाने मे ही मसरूफ़ रह गया, वक्त कब हा...
वाह, ठोकरों से सटीक वार्तालाप। ।।।
ReplyDeleteलजवाब।
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