ऐ साहुकार, तु कर न
वसूली की तकरार,
मुझे दिए हुए लोन पे,
मन्ने तो मांगा नी था,
लोन देने का कौल
तेरा ही आया था
भैया,
मेरे फोन पे ।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
सफर मे धूप तो बहुत होगी, सूरज को ढक सको तो चलो, एम्बूलैंस लेकर जा रही है रोगी, राह उसकी रोक सको तो चलो।
वाह।😅
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