ऐ साहुकार, तु कर न
वसूली की तकरार,
मुझे दिए हुए लोन पे,
मन्ने तो मांगा नी था,
लोन देने का कौल
तेरा ही आया था
भैया,
मेरे फोन पे ।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
पर्व लोहड़ी का था और हम आग देखते रहे, उद्यान राष्ट्रीय था और हम बाघ देखते रहे। ताक में बैठे शिकारी हिरन-बाज देखते रहे, हुई बात फसल कटाई की, ...
वाह।😅
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