Friday, May 17, 2024

संशय!

इतना तो न बहक पप्पू , 

बहरे ख़फ़ीफ़ की बहर बनकर,

४ जून कहीं बरपा न दें तुझपे, 

नादानियां तेरी, कहर  बनकर।

वक्त आ गया है !

वतन-ए-हिंद से लग्न लगानी है तो,

वक्ष पे 'राम' लगाना होगा।

'धर्म-निरपेक्षता' की कपट प्रवृत्ति को

अब 'वीराम' लगाना होगा ।।

Wednesday, May 15, 2024

शून्य प्रत्यय !









शहर में किराए का घर खोजता 

दर-ब-दर इंसान हैं 

और उधर,

बीच 'अंचल' की खुबसूरतियों में

कतार से, 

हवेलियां वीरान हैं।

'बेचारे' कहूं या फिर 'हालात के मारे',

पास इनके न अर्श रहा न फर्श है,

नवीनता का आकर्षण ही

रह गया जीने का उत्कर्ष है, 

इधर तन नादान हैं 

और उधर,

दिलों के अरमान हैं।

बीच 'अंचल' की खुबसूरतियों में

कतार से, 

हवेलियां वीरान हैं।।

Straight!

Don't be confused, among peace, harmony  or war,  conflict, chaos, one among them  you have to choose,  two things are  only available r...