बस भी करो अब ये सितम,
हम और न सह पाएंगे,
बदकिस्मती पे अपनी,
बल खाए न रह पाएंगे।
किस-किस को बताएं अब,
अपनी इस जुदाई का सबब,
क्या मालूम था,फैसले तुम्हारे,
हमें इस कदर तड़पाएंगे।।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
जब भी, जो भी जुबां पे आता है तुम्हारी, बक देते हो, मुफ्त में जिसका भी लिखा हुआ मिल जाए पढ़ देते हो, फुर्सत मिले तुम्हें तो सोचना, एक कमेंट...
No comments:
Post a Comment