हमेशा झूमते रहो सुबह से शाम तक,
बोतल के नीचे के आखिरी जाम तक,
खाली हो जाए तो भी जीभ टक-टका,
तब तलक जीभाएं, हलक आराम तक।
झूमती जिंदगी, तुम क्या जान पाओगे?
अरे कमीनों ! पाप जिसे निगल जाएगा
तुम्हारे न चाहते हुए भी, ठग बहराम तक।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
पता नहीं किसको ढूंढते रहे थे हम, सबसे पूछा, डाकिया,धोबी,खलासी, सबके सब फ़लसफ़े,इक-इककर खफ़े, लिए घुमते रहे बनाकर सूरत रुआँसी, उम्र गुजरी,तबअ...
वाह
ReplyDelete🙏🙏
ReplyDeleteक्या बात है !
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