झूम-झूम !
हमेशा झूमते रहो सुबह से शाम तक,
बोतल के नीचे के आखिरी जाम तक,
खाली हो जाए तो भी जीभ टक-टका,
तब तलक जीभाएं, हलक आराम तक।
झूमती जिंदगी, तुम क्या जान पाओगे?
अरे कमीनों ! पाप जिसे निगल जाएगा
तुम्हारे न चाहते हुए भी, ठग बहराम तक।
हमेशा झूमते रहो सुबह से शाम तक,
बोतल के नीचे के आखिरी जाम तक,
खाली हो जाए तो भी जीभ टक-टका,
तब तलक जीभाएं, हलक आराम तक।
झूमती जिंदगी, तुम क्या जान पाओगे?
अरे कमीनों ! पाप जिसे निगल जाएगा
तुम्हारे न चाहते हुए भी, ठग बहराम तक।
वाह
ReplyDelete🙏🙏
ReplyDeleteक्या बात है !
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