Thursday, November 6, 2025

झूम-झूम !

हमेशा झूमते रहो सुबह से शाम तक,

बोतल के नीचे के आखिरी जाम तक,

खाली हो जाए तो भी जीभ टक-टका,

तब तलक जीभाएं, हलक आराम तक।

झूमती जिंदगी, तुम क्या जान पाओगे?

अरे कमीनों ! पाप जिसे निगल जाएगा

तुम्हारे न चाहते हुए भी, ठग बहराम तक।



3 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

वाह

Monday, 10 November, 2025  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏🙏

Monday, 10 November, 2025  
Blogger नूपुरं noopuram said...

क्या बात है !

Tuesday, 11 November, 2025  

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