...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
हमेशा झूमते रहो सुबह से शाम तक,
बोतल के नीचे के आखिरी जाम तक,
खाली हो जाए तो भी जीभ टक-टका,
तब तलक जीभाएं, हलक आराम तक।
झूमती जिंदगी, तुम क्या जान पाओगे?
अरे कमीनों ! पाप जिसे निगल जाएगा
तुम्हारे न चाहते हुए भी, ठग बहराम तक।
वाह
🙏🙏
क्या बात है !
रातें अक्सर ही मुझसे सवाल किया करती हैं, और एक मैं हूं कि उनका जबाब ही नहीं देता, कभी नयन थकते थे, अब कदम थकनें लगे हैं, और कितना चल पाऊंगा...
वाह
ReplyDelete🙏🙏
ReplyDeleteक्या बात है !
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