Sunday, December 5, 2010

अहसास !


ये बताओ,
तुम्हारे
उस बहुप्रितिक्षित
कुम्भ आयोजन का
क्या हुआ,
जो तुम्हारे
हुश्न, मुहब्बत
और वफ़ा की त्रिवेणी पर
अर्से से प्रस्तावित था ?

मैं तो कबसे
अपने मन को
इस बात के लिए
प्रेरित किये था कि
इस बार मैं भी
संगम पर डुबकी लगा ,
जिगर के कुछ दाग
धो ही डालूँगा !

अब तो यही सोचकर
संयम पैरों तले से
फिसलता नहीं
कि प्रतीक्षा करवाना
तुम्हारी पुरानी आदत है !!

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15 Comments:

Blogger सूबेदार said...

बहुत ही सुन्दर अहसास कराती हुई कबिता, समय आने पर संगम पर जरुर पहुचेगे इंतजार बहुत मीठा होता है.

Wednesday, 08 December, 2010  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

इंतजार का अपना मज़ा है ।
हुश्न, मुहब्बत
और वफ़ा की त्रिवेणी--
सुन्दर अलफ़ाज़ .

Wednesday, 08 December, 2010  
Blogger संजय भास्‍कर said...

आदरणीय गोदियाल जी
नमस्कार !
अब तो यही सोचकर
संयम पैरोंतले से
फिसलता नहीं
कि प्रतीक्षा करवाना
तुम्हारी पुरानी आदत है !!

AADATE SUDHAR LE SIR JI........

Thursday, 09 December, 2010  
Blogger संजय भास्‍कर said...

हर बार की तरह शानदार प्रस्तुति

Thursday, 09 December, 2010  
Blogger संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वाह ..बहुत सुन्दर ..

.अब तो यही सोचकर
संयम पैरोंतले से
फिसलता नहीं
कि प्रतीक्षा करवाना
तुम्हारी पुरानी आदत है !

अब आदत से परिचित ही हैं तो इंतज़ार कर ही लीजिए ...

Thursday, 09 December, 2010  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

मैं तो कबसे
अपने मन को
इस बात के लिए
प्रेरित किये था कि
इस बार मैं भी
संगम पर,
जिगर के कुछ दाग
धो ही डालूँगा ...


गोदियाल जी ... आज तो बिलकुल alag hat कर ... mousam का asar hone laga है ... बहुत लाजवाब ehsas है ...

Thursday, 09 December, 2010  
Blogger प्रवीण पाण्डेय said...

उस त्रिवेणी के लिये कुम्भ जैसे आयोजन की क्या आवश्यकता, वह तो वैसे ही सतत प्रवाहमान रहे।

Thursday, 09 December, 2010  
Blogger ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही सुंदर और मुग्ध कर देने वाली रचना.

रामराम.

Thursday, 09 December, 2010  
Blogger ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही सुंदर और मुग्ध कर देने वाली रचना.

रामराम.

Thursday, 09 December, 2010  
Blogger vandana gupta said...

अब तो यही सोचकर
संयम पैरोंतले से
फिसलता नहीं
कि प्रतीक्षा करवाना
तुम्हारी पुरानी आदत है !!
वाह! गज़ब कर दिया …………मंत्रमुग्ध कर दिया।

Thursday, 09 December, 2010  
Blogger चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

जो मज़ा इन्तेज़ार में है वो मिलन में कहां... तो, करते रहिए इन्तेज़ार:)

Thursday, 09 December, 2010  
Blogger शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

Friday, 10 December, 2010  
Blogger Sushil Bakliwal said...

हुस्न, मोहब्बत और वफा की त्रिवेणी पर कुंभ मेले का आयोजन. शानदार सामंजस्य.
मेरी नई पोस्ट 'भ्रष्टाचार पर सशक्त प्रहार' पर आपके सार्थक विचारों की प्रतिक्षा है...
www.najariya.blogspot.com

Friday, 10 December, 2010  
Blogger हरकीरत ' हीर' said...

हुश्न, मुहब्बत और वफ़ा की त्रिवेणी पर....जिगर के दाग ......??


ओये होए क्या बात है ....!!

Friday, 10 December, 2010  
Blogger भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत खूब...

Saturday, 11 December, 2010  

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