दारुण दिखता दृश्य यह, गायब दोनों हाथ | पैरों पर स्याही लगे, सत्साहस है साथ | सत्साहस है साथ, अनोखा वोटर आया | करता चोखा काम, एक सन्देश सुनाया | धन्य धन्य विकलांग, देह से दीखते भारु | लेकिन हैं कुछ लोग, मांगते पहले दारू ||
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...! -- आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (05-12-2013) को "जीवन के रंग" चर्चा -1452 पर भी है! -- सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। -- हार्दिक शुभकामनाओं के साथ। सादर...! डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
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8 Comments:
सबसे पहले तो बहुत दिनों के बाद दर्शन देने पर स्वागत है। गजब का जज्बा।
दारुण दिखता दृश्य यह, गायब दोनों हाथ |
पैरों पर स्याही लगे, सत्साहस है साथ |
सत्साहस है साथ, अनोखा वोटर आया |
करता चोखा काम, एक सन्देश सुनाया |
धन्य धन्य विकलांग, देह से दीखते भारु |
लेकिन हैं कुछ लोग, मांगते पहले दारू ||
इस जज्बे को हमारा भी सलाम!
प्रेरक प्रस्तुति ...
बहुत सुंदर प्रेरक चित्र और प्रस्तुति ....!
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नई पोस्ट-: चुनाव आया...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (05-12-2013) को "जीवन के रंग" चर्चा -1452
पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
प्रेरक ... सच मेमिन जो होते हुए भी उपयोग नहीं करते मत का ... उन्हें बात करने का भी हक नहीं है ...
स्वागत है भाई जी .....ज़ज्बे का ..ज़ज्बे को सलाम !
वाकई सलाम करने योग्य हैं.
रामराम.
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