जिसदिन से तरसीम ऊपर गया
मिरी शख़्सियत और हैसियत का,
ख़्याल सताने लगा है जमाने को,
मिरी खै़रियत और कैफि़यत का।
तरसीम/तर्सीम= लेखाचित्र(graph)
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
गलियां सब वीरां-वीरां सी, उखड़े-उखड़े सभी खूंटे थे, तमाशबीन बने बैठे दो सितारे, सहमे-सहमे से रूठे थे। डरी सूरत बता रही थी,बिखरे महीन कांच क...
बहुत सुन्दर।
ReplyDeleteअन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
जिसदिन से तरसीम ऊपर गया
ReplyDeleteमिरी शख़्सियत और हैसियत का,
ख़्याल सताने लगा है जमाने को,
मिरी खै़रियत और कैफि़यत का।
वाह बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
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