ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
वाह.. क्या बात।
ReplyDeleteनई रचना
मार्मिक और हृदय स्पर्शी रचना।
ReplyDeleteहृदय स्पर्शी
ReplyDeleteमार्मिक रचना
ReplyDeleteजब वो,
ReplyDeleteदर्द-ऐ-दिल अपना,
शब्दों मे न समेट पाया
तो कमबख़्त,
आंसू बनके
उसकी आँखों से छलक आया।
बहुत ही सुन्दर लिखा है अपने ब्लॉग में आपने। इसके लिए आपका दिल से धन्यवाद। Visit Our Blog Zee Talwara