Tuesday, July 28, 2020

आरजू

गर सुधार न हो पाये तो
 तुम माफ कर देना,
हर उस किये को,
कसूर चाहे बाती का हो
या तेल की गुणवत्ता का,
नहीं मालूम, मगर तुम
दोष मत देना, दीये को।

8 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 30.7.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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  2. वाह बहुत सुंदर क्षणिका सार्थक भावपूर्ण।

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