...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
सही निरूपण किया है..
वाह!
सटीक पकडा.:)रामराम.
आते ही धमाका ... इतने दिनों बाद आए ओर सटीक निशाना ...
बड़ा गेट चाहिये...
सटीक स्मारिका!
सच में..किस-किस का लिखते..किस-किस का छोड़ते...लिखकर हटते तो एक नया नाम आ जाता....जिसका नाम छोड़ देते ..वो आपसे अलग नाराज हो जाता....बढ़िया किया जो किसी का नाम नहीं लिखा..
घोटालेबाजों का नाम खुदवाने के लिए अपर्याप्त दीवार स्थल।
बहुत मजबूत गेट ..
हो वर्चस्व की यदि अंंतहीन जंग, उसे मरते दम तक कभी न हारो, भद्र-प्रतिद्वंद्वी, बर्ताव हो निश्छल, हो शत्रु कपटी, उसे होश से मारो। मरुधर जो उ...
सही निरूपण किया है..
ReplyDeleteवाह!
ReplyDeleteसटीक पकडा.:)
ReplyDeleteरामराम.
आते ही धमाका ... इतने दिनों बाद आए ओर सटीक निशाना ...
ReplyDeleteबड़ा गेट चाहिये...
ReplyDeleteसटीक स्मारिका!
ReplyDeleteसच में..किस-किस का लिखते..किस-किस का छोड़ते...लिखकर हटते तो एक नया नाम आ जाता....जिसका नाम छोड़ देते ..वो आपसे अलग नाराज हो जाता....बढ़िया किया जो किसी का नाम नहीं लिखा..
ReplyDeleteघोटालेबाजों का नाम खुदवाने के लिए अपर्याप्त दीवार स्थल।
ReplyDeleteबहुत मजबूत गेट ..
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