यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
अजब स्थिति है..
ReplyDeleteहा हा ... सही दृष्टि मारी है ...
ReplyDeleteक्या कटाक्ष है गजब!
ReplyDeleteहा हा हा ......
ReplyDeleteराम मिलायी जोडी, तू अंधा मैं खोडी.
ReplyDeleteरामराम.
मिले सुर मेरा तुम्हारा ---
ReplyDeleteब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन क्या आईपीएल, क्या बॉस का पारा, खेल है फ़िक्स्ड सारा - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
ReplyDeleteबल्ले बल्ले
ReplyDeleteये भी खूब रही!!!
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