...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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Straight!
Don't be confused, among peace, harmony or war, conflict, chaos, one among them you have to choose, two things are only available r...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
सुन्दर कविता। शुभकामनाओं में आपको वसंत भेजते हैं।
ReplyDeleteAapko bhee Vikesh ji !
Deleteसार्थक प्रस्तुति।
ReplyDelete--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (25-01-2015) को "मुखर होती एक मूक वेदना" (चर्चा-1869) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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बसन्तपञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत सुन्दर l वसंत पंचमी की सुभकामनाएँ l
ReplyDeleteवसंत पंचमी
सार्थक रचना
ReplyDeleteसुन्दर सार्थक रचना ...
ReplyDeleteआपको वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें ...
सुन्दर आराधना...माँ सरस्वती सभी पर ज्ञान रूपी आशीर्वाद बरसाती रहें!!
ReplyDeleteसुन्दर सार्थक रचना
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