Tuesday, October 25, 2016

Because.....


1 comment:

  1. हा हा मस्त ... मिस्त्री साहब गए ... क्या बात ...

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कश्मकश

खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे, क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे, पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत', मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे...