यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

शुभकामनाएं।
ReplyDeleteआपको भी दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ !
Deleteबहुत सुन्दर प्रेरक सामयिक रचना
ReplyDeleteआपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
आपको भी दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ, कविता जी !
Deleteबहुत सुंदर , दीप पर्व मुबारक !
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