सबकी उलझनों को सुलझाने मे ही बसर गई,
उलझी अपनी भी थी 'परचेत', मगर गुज़र गई...
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
सच बोलने का फलसफा कुछ ऐसा मिला 'परचेत', कि किसी ने भी बढ़कर कभी गले नहीं लगाया।
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