यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

चलो तस्वीर ही सही बोलती तो है ..
ReplyDeleteबहुत बढ़िया प्रस्तुति
दाने दाने को दिखा, कोयलांचल मुहताज ।
ReplyDeleteदान दून दे दनादन, दमके दिल्ली राज ।
दमके दिल्ली राज, घुटे ही करें घुटाला ।
बाशिंदों पर गाज, किसी ने नहीं सँभाला ।
नक्सल भी नाराज, विषैला धुवाँ मुहाने ।
धधके अंतर आग, लुटाते लंठ खदाने ।।
@कविता जी-तस्वीर में भी कोयला और रुपये ही बोल रहे है.....
ReplyDeleteकुँवर जी,
वाह ... सच बोल रही है तस्वीर ...
ReplyDeleteबल्कि ज्यादा जवान बना रही है इन्हें ...
:):)
ReplyDeleteबढ़िया !
ReplyDeleteतस्वीर का सच, देश का सच. और परिणति.....
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ReplyDeleteआपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बृहस्पतिवार (06-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ...!
अध्यापकदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
कोलमाल शब्द ही बड़ा जानदार है। कार्टून तो खैर है ही।
ReplyDeleteक्या कोल है दे रहा माल ही माल है
ReplyDeleteसब सही है कहीं नहीं कुछ गोलमाल है !
बेशर्म सरकार है
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