...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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हकीकत
उजागर न होने दिया हमने उजागर न करने के ऐब से, वाकिफ बहुत खूब थे हम, तुम्हारे छल और फरेब से।
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...

चलो तस्वीर ही सही बोलती तो है ..
ReplyDeleteबहुत बढ़िया प्रस्तुति
दाने दाने को दिखा, कोयलांचल मुहताज ।
ReplyDeleteदान दून दे दनादन, दमके दिल्ली राज ।
दमके दिल्ली राज, घुटे ही करें घुटाला ।
बाशिंदों पर गाज, किसी ने नहीं सँभाला ।
नक्सल भी नाराज, विषैला धुवाँ मुहाने ।
धधके अंतर आग, लुटाते लंठ खदाने ।।
@कविता जी-तस्वीर में भी कोयला और रुपये ही बोल रहे है.....
ReplyDeleteकुँवर जी,
वाह ... सच बोल रही है तस्वीर ...
ReplyDeleteबल्कि ज्यादा जवान बना रही है इन्हें ...
:):)
ReplyDeleteबढ़िया !
ReplyDeleteतस्वीर का सच, देश का सच. और परिणति.....
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ReplyDeleteआपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बृहस्पतिवार (06-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ...!
अध्यापकदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
कोलमाल शब्द ही बड़ा जानदार है। कार्टून तो खैर है ही।
ReplyDeleteक्या कोल है दे रहा माल ही माल है
ReplyDeleteसब सही है कहीं नहीं कुछ गोलमाल है !
बेशर्म सरकार है
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