...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
द्वंद्व
उलझकर मेरी बातें कुछ यूं, तुम्हारी बातों में रह गई, दिल की जो भी ख्वाहिशें थी, जज्बातों में बह गई। जिया उलझाने की तुम्हारी ये हरकतें बड़...
-
नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
-
देशवासियों तुम हमें सत्ता देंगे तो हम तुम्हें गुजारा भत्ता देंगे। सारे भूखे-नंगों की जमात को, बिजली-पानी, कपड़ा-लत्ता देंगे। ...
-
स्कूटर और उनकी पत्नी स्कूटी शहर के उत्तरी हिस्से में सरकारी आवास संस्था द्वारा निम्न आय वर्ग के लोगो के लिए ख़ासतौर पर निर्म...

अब थोड़े कम आयेंगे।
ReplyDeleteइत्ते सारे !...अब कहाँ बाँटे ?
ReplyDeleteहा हा .. सटीक .. बांटेंगे अब अपने कजरी ...
ReplyDeleteबिल्कुल सही
ReplyDeleteसही है।
ReplyDelete:)
ReplyDeleteहमने तो सीजन समझकर बेचने के लिये, इतने सारे छपवाये थे पर छपाई की कास्ट भी नही निकली.:)
ReplyDeleteरामराम.