...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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चराग तले...
नाम सूरत और शहर की ऐसी सूरत, आ जाते हैं, मुंह उठाके ज़रूरत बे-ज़रूरत, मशहूर हो जाने की ख़्वाहिश है मगर, चराग ढूंढे है फिर भी 'परचेत...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...

अब थोड़े कम आयेंगे।
ReplyDeleteइत्ते सारे !...अब कहाँ बाँटे ?
ReplyDeleteहा हा .. सटीक .. बांटेंगे अब अपने कजरी ...
ReplyDeleteबिल्कुल सही
ReplyDeleteसही है।
ReplyDelete:)
ReplyDeleteहमने तो सीजन समझकर बेचने के लिये, इतने सारे छपवाये थे पर छपाई की कास्ट भी नही निकली.:)
ReplyDeleteरामराम.