...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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हक़ीक़ते ए जिंदगी।
बयां करना चाहता था ऐ जिंदगी, तुझे, अपने इक बंजर से खेत सी, मुठ्ठी में समेटना चाहा था बहुत मगर, हथेली से फिसल गई तू रेत सी।
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
श्री गणेश जी ,जिस तत्व से रचे हैं उसे धोना तो ठीक ...पर मोबाइल ?...शुद्धता तो उस पर बोलनेवालों की .....
ReplyDeleteHa-ha.. Pratibha Ji, AAJkal Jubaan kaun dekhtaa hai sab Mobile ko dekhte hai :-)
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