मुझे चाहिए इक ऐसा खोता, जब मैं चांहू तब उसे जोता। ढेंचू-ढेंचू करता वो दौड़ा आये, जब दूं समीप आने का न्योता। मुझे चाहिए इक ऐसा खोता..... कूल रहे हमेशा, जहां तक हो, किसी बड़े स्कूल से स्नातक हो, बोल न बोले कोई दिल चुभो ता, मुझे चाहिए इक ऐसा खोता..... ऋतु मुताबिक गाना गाना जाने, हर व्यंजन,पकवान पकाना जाने, कभी भी ऐन वक्त पे मिले न सोता, मुझे चाहिए इक ऐसा खोता.....
बढ़िया
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (07-11-2015) को "एक समय का कीजिए, दिन में अब उपवास" (चर्चा अंक 2153) पर भी होगी।
ReplyDelete--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
पुरुस्कारों का अविष्कारक कौन है?
ReplyDelete