हो चाहे जितनी भी मुहब्बत
तुझको संजय रौत से,
करे जितनी भी नफ़रत
तू कगंना रणौत से,
देखना,सत्ता का ये गुरूर,
तुम्हें ले डूबेगा हुजूर ।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
अबे, पहले तो ये बता तू है कौन? तुम जैसों के मुंह लगना मेरा चस्का नहीं, मेरी तो बीवी से भी बिगड़ी पड़ी है, चल हट, मुझे सम्हालना तेरे बस का न...
कौन डूब रहा है हजूर? :) हवा भरे भी डूबे हैं कभी ?
ReplyDeleteसही कहा, सर जी😀
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