हो चाहे जितनी भी मुहब्बत
तुझको संजय रौत से,
करे जितनी भी नफ़रत
तू कगंना रणौत से,
देखना,सत्ता का ये गुरूर,
तुम्हें ले डूबेगा हुजूर ।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
Don't be confused, among peace, harmony or war, conflict, chaos, one among them you have to choose, two things are only available r...
कौन डूब रहा है हजूर? :) हवा भरे भी डूबे हैं कभी ?
ReplyDeleteसही कहा, सर जी😀
Delete