कोरोना विडंबना

 गले लगाया है तेरी जुल्फो़ंं की मोहब्बत ने, 

जबसे तन्हाइयों को,

 गाहक मिलने ही बन्द हो गये, 'परचेत' 

तमाम शहर के नाइयों को।

Comments

  1. मन की बात
    क्या कटाक्ष मारा है।
    😂😂
    नई रचना आत्मनिर्भर

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  2. हा हा सही कहा है आपने ... डर लगता है नाइयों के पास जाने में अब ....

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