लगे हैं जो मेरे शब्द तुमको अप्रिय,
निकले न मेरे मुंह से होते,
ऐ प्रिये, जबरन जो मेरे मुंह मे
अपने शब्द, तुमने न ठूंसे होते।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
वर्ण आखिरी, वैश्य, क्षत्रिय, विप्र सभी, सनातनी नववर्ष का जश्न मनाया कभी ? नहीं, स्व-नवबर्ष के प्रति जब व्यवहार ऐसा, फिर पश्चिमी नवबर्ष पर...
सार्थक रचना।
ReplyDeleteआने वाले नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।
Sir,aapko air aapke parivar ko bhi.🙏
Deleteआपकी इस प्रस्तुति का लिंक 31.12.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा| आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी
ReplyDeleteधन्यवाद
जबरन जो मेरे मुंह मे
ReplyDeleteअपने शब्द, तुमने न ठूंसे होते...बहुत सुंदर सर।
🙏aabhar Anita ji, aapka.
ReplyDeleteनव वर्ष शुभ हो सभी के लिये सपरिवार। मंगलकामनाएं।
ReplyDeleteसर, नूतनबर्ष की हार्दिक शुभकामनाए, आप और आपके सभी परिवारजनों को।
Deleteहाँ,कभी कभी ना चाहते हुए भी मुँह से निकल ही जाती कुछ बातें,आपको और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
ReplyDeleteआपको भी मंगलमय नूतनबर्ष की कामना।🙏
Deleteवाह बहुत खूब
ReplyDeleteआभार, खरे सहाब। नवबर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाएं।
ReplyDeleteसुन्दर - - नूतन वर्ष की असीम शुभकामनाएं।
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