यही पूछने को बेताब है 'परचेत' जमाने भर से कि
आखिर दीखता कैंसा होगा पलकों का शामियाना ।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
हमसे पूछना है 'परचेत, तो यह पूछो कि किया जाता है कैसे मुस्कुराकर गम छुपाना।
No comments:
Post a Comment