तीन-तीन गुलामियों का
यही तो सबसे बडा राज है
जो देशभर की सडकों पर
दिखाई दे रहा आज है।
राष्ट्रहित मे खुद को,
मिटा दिया था कुछ फौलदों ने,
मगर, गुड-गोबर एक कर दिया,
जयचंद की औलादों ने।।
इसलिए, जागो सोने वालों, जागो!
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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परिभाषा
कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं कि जो फटते नहीं, फासले अगर बढ़ने लगें तो फिर घटते नहीं।
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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