वो अपने मुंह मिंया मिठ्ठू ,
डींग हांकते फिरते थे कि
मुसलमानों के मुर्दे जला नहीं करते,
कल तुम जब शमशान के करीब से
मटक-मटक कर गुजर रही थी,
कई दफनमुरादोंं को जलते हुए
मैंने खुद अपनी आ़ंखो से देखा।🤣🤣🤣
डींग हांकते फिरते थे कि
मुसलमानों के मुर्दे जला नहीं करते,
कल तुम जब शमशान के करीब से
मटक-मटक कर गुजर रही थी,
कई दफनमुरादोंं को जलते हुए
मैंने खुद अपनी आ़ंखो से देखा।🤣🤣🤣
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 23.01.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3589 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी ।
ReplyDeleteधन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 23.01.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3589 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी ।
ReplyDeleteधन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क
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ReplyDeleteवाह
ReplyDeleteबहुत खूब
आभार, खरे सहाब।
Deleteवाह रे खूबसूरती।
ReplyDelete😜
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