Sunday, February 2, 2020

कुछ अंश मेरी काव्यपुस्तक "तहकी़कात जारी रहेगी" से.....

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लॉकडाउन को-रोना-२०१९ की घरेलू हिंसा।

गलियां सब वीरां-वीरां सी, उखड़े-उखड़े सभी खूंटे थे, तमाशबीन बने बैठे दो सितारे, सहमे-सहमे से रूठे थे।  डरी सूरत बता रही थी,बिखरे महीन कांच क...