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Showing posts from September, 2020

आओ, तुमको कथा सुनाऊं

मोदीजी सुनाते मन की बात,  और मैं मन की व्यथा सुनाऊंं,  सुनो ऐ प्यारे हिन्द वासियों, आओ, मैं तुमको कथा सुनाऊं। एक सूखी डंठल, जड़ मजीठ का, किंतु, कथावाचक हूँ व्यास पीठ का, छै महिने लॉकडाउन, बंद कमरे मे कितना इस मन को मथा सुनाऊं। बताओ, वाचन करुं मैं शुरू कहाँ से, राजा यथा सुनाऊं या प्रजा तथा सुनाऊं? सुनो ऐ प्यारे हिन्द वासियों, आओ, मैं तुमको कथा सुनाऊं।।

अचम्भा।

जबसे अकृत्यकारी चीन के कोरोना जी ने तमाम दुनिया को फांसा हैं, शायद आपने गौर किया हो, केजरीवाल जी एक बार भी नहीं खांसा है।😂😂

क्रिया-प्रतिक्रिया।

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कोरोना- भ्रम

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हमने चेहरे पे मास्क क्या लगाया 'परचेत',   कुछ नादां  हमें बेजुबांं समझ बैठे, फितरतन, चुप रहने की आदत तो न थी,  क्या करे, बेवश थे चीनी तोहफे़ के आगे।

कोरोना विडंबना

  गले लगाया है तेरी जुल्फो़ंं की मोहब्बत ने,  जबसे तन्हाइयों को,  गाहक मिलने ही बन्द हो गये, 'परचेत'  तमाम शहर के नाइयों को।

मुखबंदी

  चम्मचे-ए-खास अभी अभी गये, मुंह खोला तो गुलाम नबी गये।।😀😀

कोरी ऐंठन

 हो चाहे जितनी भी मुहब्बत  तुझको संजय रौत से, करे जितनी भी नफ़रत  तू कगंना रणौत से,  देखना,सत्ता का ये गुरूर,  तुम्हें ले डूबेगा हुजूर ।

परिचित, आज फिर मिलने कुछ शामें आई थीं।

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निकले थे दिनकर इंद्रप्रस्थ से और सांझ उनकी गुरुग्राम गई, गुम, कुछ वाहियात सी ख्व़ाहिशे, आडे-तिरछे जिन्हें बुना था कभी, चुस्त एकाकीपन की सलाइयों से, ढूंढते हुए उन्हें इक और शाम गई। xxxxxxxxxxxxxxxxxxxx पद्य पर गजब का नशा था जमाने मे, और मै व्यवस्थ रहा, गद्य सजाने मे।