Sunday, February 7, 2021

एकाकीपन का सबब..

मत पूछ मुझसे, इस ढलती हुई उम्र के 

मेरे एकाकीपन का सबब, ऐ जिन्दगी !

बस, यूं समझ कि यह सब तेरे कर्ज की 

अगली किश्त अदाइगी़ की जद्दोजहद है।

3 comments:

वाहियात

आज जैसे उन्होंने मुझे, पानी पी-पीकर कोसा, इंसानियत से 'परचेत', अब उठ गया भरोसा।