तवाही का मंजर-ए-खौफ़, ऐ मानव,
तू अपने दिल मे पाले रखना,
क्षंणभंगूर सी है यह जिंदगी,
कुदरत की ये तस्वीरे संभाले रखना।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
आज जैसे उन्होंने मुझे, पानी पी-पीकर कोसा, इंसानियत से 'परचेत', अब उठ गया भरोसा।
वर्तमान को इंगित करती मार्मिक प्रस्तुति।
ReplyDeleteतवाही का मंजर-ए-खौफ़, ऐ मानव,
ReplyDeleteतू अपने दिल मे पाले रखना,
क्षंणभंगूर सी है यह जिंदगी,
कुदरत की ये तस्वीरे संभाले रखना।
वाह बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
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