Friday, November 5, 2021

शुभ दीपावली










'दीपोत्सव"

मुल्क़ मे हाकिमों के हुक्मों की गहमा़गहमी़ है।

'दीया' खामोश है और रोशनी सहमी़-सहमी़ है।

डर है, दम घुटकर न मर जाएं, कुछ 'मीं-लार्ड्स',

'भाग' से ज्यादा जीने की, कैंसी गलतफहमी़ है?


7 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(०६-११-२०२१) को
    'शुभ दीपावली'(चर्चा अंक -४२३९)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  2. एकदम सही कहा आपने सर
    ही उम्दा रचना!
    आपका About बहुत ही अच्छा है!

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  3. सटीक सार्थक सृजन।

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मुझे नही पता..।

इस मानसून की विदाई पर,  वो जो कुछ मौसमी प्रेम बीज , तू मेरे दिल के दरीचे मे बोएगी, यूं तो खास मालूम नहीं , मगर यदि वो अंकुरित न हुए तो  इतना...