'दीपोत्सव"
मुल्क़ मे हाकिमों के हुक्मों की गहमा़गहमी़ है।
'दीया' खामोश है और रोशनी सहमी़-सहमी़ है।
डर है, दम घुटकर न मर जाएं, कुछ 'मीं-लार्ड्स',
'भाग' से ज्यादा जीने की, कैंसी गलतफहमी़ है?
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
रूठ जाते हैं मुझसे मेरे अपने ही और मुझको मनाने मे जरा भी रुचि नहीं, दिलचस्प हों भी अगर मुहब्बत की राहें, क्या फायदा, जब दिल मे ही शुचि नहीं...
फिर भी मंगलकामनाएं
ReplyDeleteशुभ दीपावली।
ReplyDeleteजी नमस्ते ,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(०६-११-२०२१) को
'शुभ दीपावली'(चर्चा अंक -४२३९) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
सुंदर
ReplyDeleteएकदम सही कहा आपने सर
ReplyDeleteही उम्दा रचना!
आपका About बहुत ही अच्छा है!
आभार आपका, मनीषा जी🙏
Deleteसटीक सार्थक सृजन।
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