...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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Yकीं
रात गहरी बहुत है मगर, यकीं रखो, हम सोएंगे नहीं। तूम रुलाने की जितनी भी कोशिश कर लो, रोएंगे नहीं, बेदना के पार्क मे सन्नाटे संग खामोशी भ...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...

good one
ReplyDeleteमहासंतुलन योग..
ReplyDeleteye cartoon bahut kuch bol rha h...
ReplyDeleteachcha yoga hain. :))
पूर्ती का इक अर्थ है, गुणन गुणा का काम ।
ReplyDeleteफुर्ती से कर पूर्ती, दे मंत्री पैगाम।
दे मंत्री पैगाम, रास्ता बड़ा बना लो ।
छोटा सा इक पाथ, हमारे घर में ढालो ।
पतली चलनी आज, मोटा सूप बिसूरती ।
बाड्रा ना सलमान, हुआ बदनाम पूर्ती ।।
इन लोगों का राज अब पता चला.
ReplyDeleteकहां कहां से देखने के दिन आ गए, हे राम
ReplyDeleteghanghor arth shaashtree
ReplyDeleteसंतुलन अतुलनीय ।
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