Wednesday, February 20, 2019

आत्ममंथन !

बस, आज 
कुछ नहीं कहने का
क्योंकि आज अवसर है
शूरवीरो की पावन सरजमीं के 
बंदीगृह के बंदियों से, 
कुछ सीख लेने का ।

2 Comments:

Blogger संजय भास्‍कर said...

एकदम सटीक

Friday, 22 February, 2019  
Blogger प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' said...

बहुत सुंदर रचना....

Thursday, 21 March, 2019  

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