Posts

Showing posts from January, 2020

दिल

वो अपने मुंह मिंया मिठ्ठू ,  डींग हांकते फिरते थे कि मुसलमानों के मुर्दे जला नहीं करते, कल तुम जब शमशान के करीब से मटक-मटक कर गुजर रही थी, कई दफनमुरादोंं को जलते हुए मैंने खुद अपनी आ़ंखो से देखा।🤣🤣🤣                  

श्री 420

Image
Image
'अˈबिचुअरि बुक' (obituary book) मे सबसे अच्छी टिप्पणी मुझे,  अपने पडोसी की लगी। लिखा था: " ठिठुरती रातों मे भी  यह कमबख्त,  इसकी रसोई  और इमामदस्ता,  रोजाना दो और तीन बजे के मध्य,  हमारी नींद मे, अदरक कूठने की  आवाज से खलल डाला करता था।।"

पीर पराई ।

Image
दर्द उनका, सिर्फ वहीं जान पायेंगे जिन्हें, तमाम रात नींद नहीं आती, खामोश निशा, आंखों ही आंखों मे घिसट-घिसट कर कैंसे गुजर जाती। ऐ गुलजार, ये तुम्हें है मालूम कि मुझे, सुबह होने मे कितने जमाने लगते हैं।।

जागो सोने वालों, जागो !

तीन-तीन गुलामियों का यही तो सबसे बडा राज है जो देशभर की सडकों पर दिखाई दे रहा आज है। राष्ट्रहित मे खुद को, मिटा दिया था कुछ फौलदों ने, मगर, गुड-गोबर एक कर दिया, जयचंद की औलादों ने।। इसलिए, जागो सोने वालों, जागो!

जागो सोने वालों, वक्त रहते जागो।

मितरों, आज जो कुछ हमारे इस देश मे हो रहा है, उसे देखकर सिर्फ हैरानी और अफसोस होता है। भगवान को साक्ष्य मानकर आपको आज की एक सच्ची घटना, जो मेरे साथ हुई और जिसे मैंने हर कोण से नापना चाहा, आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। मैं जानता हूँ कि इस बात को हमारे ही बीच के बहुत से ज्ञानी लोग, खासकर तथाकथित लिबरल हिंदू, सामप्रदायिक रंग मे रंगना चाहेंगे। मगर, उनसे सिर्फ़ यही कहूंगा कि: आगे जो वक्त आ रहा है, कोई पोंंछने न आएगा पास तुम्हारे और आखें तुम्हारी भरी की भरी रहेंंगी, जो सहिष्णुता आज उन संग तुम दिखाने की फिराक मे हो, तुम्हारी बारी वो सारी धरी की धरी रहेंगी। और यह बात मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ। खासकर, यह वीडियो मैं इसलिए चस्पा कर रहा हूँ क्योंकि इस देश मे आज जो हो रहा है, उससे वीडियो की परिस्थितियां हू-ब-हू मिलती हैं। आगे वाले ने सफेद लाइन के ऊपर जम्प मारा, पीछे वाले सभी सफेद लाइन पर जम्प मार रहे हैं😆😆 देश में भी यही हो रहा हैं। कई लोगो को मालूम  ही नही की किसका विरोध कर रहे हैं। वे बस, इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योकि दूसरे जो कर रहे हैं । मत भूलो कि जब उन्हें अवसर मिला, वे द...

इल्तिजा

Image

यकीं

Image

ये मेरा शहर !

नाइंसाफी की भी हद है इस शहर मे, कोई फर्क नहीं, सुबह, शाम और दोपहर मे। नूतन वर्ष के बहाने, कोई डूबा है जशन मे, नववर्ष की पूर्व संध्या पर पार्टी मे, उसने सबको बुलाया, मुझे नहीं, कोई जी रहा है इसी टशन मे। जो दरिद्रता से नंगा है, कोशिश कर रहा तन ढकने की और जो समृद्ध है, नंगा ही नजर आ रहा, वसन मे।।

2020

आपको और आपके परिवार को नववर्ष की शुभकामनाये💐💐 2020 आप सभी के जीवन मेँ खुशहाली लेकर आये और आप सभी स्वस्थ रहे खुश रहे! HAPPY NEW YEAR 2020 !💐