यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

हो गया...
ReplyDeleteहा हा जोरदार प्रस्तुति....आभार
ReplyDeleteहा हा हा।
ReplyDeleteहा हा ....कार्टून का साइज़ थोड़ा बड़ा करके लगाना था ..
ReplyDeleteहो ही गये।
ReplyDeleteहा हा हा.....
ReplyDeleteजब भी इलेक्शन हो तो रिज़ल्ट ऐसा ही होना चाहिए, जो भी पार्टी जीते उसे पूर्ण बहुत अवश्य मिलना चाहिए, वर्ना नेता भ्रष्टाचारियों से दलाल की भूमिका में आजाते हैं.
बे ’चारा’ हुआ तो बढिया हुआ, दुसरो को भी चारा मिल जायेगा.:)
ReplyDeleteसुंदर और सटीक कार्टून, प्रणाम.
रामराम.
ha ha ha ha ha.......
ReplyDeletesateek
गोदियाल जी ;
ReplyDeleteमुनाली की सैर के बाद लिखी आपकी रचनाएं अभी देखीं ,सबमें आपने हकीकत बयानी की है.लालू पर कार्टून भी सटीक लगाया है.
मेरे ब्लाग पर आपकी व्यक्त राय भी उपयुक्त है.
आप अभी तक पूर्ण स्वस्थ नहीं हैं यह ज्ञात होकर चिंता हुयी. आप जो भी इलाज कर रहे हैं उसके साथ -साथ एक स्तुति सुबह -शाम कर लें तो शीघ्र लाभ होगा ,आपके ई .मेल पर भेज रहे हैं.
सटीक ... हो गया अब तो जो होना था .
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