...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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शुन्य
उसका स्वरूप हरदम सराहता हूं, जिस रोशनी को दिल से चाहता हूं, आश लगाए रहता हूं कि रोशनी कभी तो मेरे घर आएगी, अतिशय प्रेममय होकर आलिंगनबद्...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
:):) सटीक
ReplyDeletekiya baat hai ! bhai ji Mazaaa Aaa Giya ...steek:ha ha ha :-)
ReplyDeleteहाहाहाहा सटीक।
ReplyDeleteइनके भक्तों का भी उद्धार हो।
ReplyDeleteहाहाहाहा
ReplyDeleteअब तो यहीं बहुत काम मिल गया है भाई ।
ReplyDeleteस्विस बैंक तो फीके लग रहे हैं ।
बहुअयामी प्रतिभा के धनी है आप गोदियाल जी, यह कार्टून भी उसी की बानगी है.
ReplyDeleteहा हा हा ये न खुलेगा सर । इनके महंत ससुरे सब के सब एक से एक महाठग जो ठहरे
ReplyDeleteइसी प्रयास में तो लगे हैं अन्ना साहब और बाबा साहब :)
ReplyDeleteसही वक्त पर सटीक कार्टून!
ReplyDeleteवाह .. गज़ब .. मज़ा आ गया ...
ReplyDeleteआदरणीय गोदियाल जी
ReplyDeleteनमस्कार !
....सटीक आनंद आया
अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
ReplyDeleteआप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,
बिलकुल सटीक ... अब सरकार सभी खजाने ... मंदिरों के तहखाने तुडवा के ही दम लेगी ...
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