चम्मचे-ए-खास अभी अभी गये,
मुंह खोला तो गुलाम नबी गये।।😀😀...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
Saturday, September 12, 2020
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बहुरूपिये!
अब कहूं भी कैंसे कि तू हिसाब-ए-मुहब्बत, किस तरह मुझसे गिन-गिन के लेती थी, रहती तो हमेशा नज़रों के सामने थी, मगर जमाने के आगे कुछ कम ही दिखा...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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देशवासियों तुम हमें सत्ता देंगे तो हम तुम्हें गुजारा भत्ता देंगे। सारे भूखे-नंगों की जमात को, बिजली-पानी, कपड़ा-लत्ता देंगे। ...
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स्कूटर और उनकी पत्नी स्कूटी शहर के उत्तरी हिस्से में सरकारी आवास संस्था द्वारा निम्न आय वर्ग के लोगो के लिए ख़ासतौर पर निर्म...
जंगल में बदलते चले जाइये उदबिलावों को
ReplyDeleteचूहे अब शेर की प्लेट में ही रहेंगे कई सालों।
एकदम सही।
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