कृषि सुधार 'व्हिस्की के पैग' का
तुम्ही बताओ सुरूर क्या था?
वो 'साला' कानून अगर,
जितना बताया,
उतना ही काला था तो लाना जुरूर क्या था?
सालभर आते-जाते, दिल्ली की सीमाओं पर
जिन्होंने दुर्गति झेली,
ऐ हुजूर, लगे हाथ यह भी बता देते,
उनका कुसूर क्या था?
#आज जार्ज बरनार्ड शा फिर सही साबित हुए।

लाजवाब
ReplyDelete🙏
Deleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 21 नवम्बर 2021 को साझा की गयी है....
ReplyDeleteपाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
सही,सटीक प्रश्न करती लाजवाब कृति ।
ReplyDeleteसटीक प्रशन्न!
ReplyDeleteबहुत ही शानदार कृति!
आभार, आप सभी का 🙏
ReplyDeleteबहुत बहुत ही सुंदर सराहनीय सृजन। Om Namah Shivay Images
ReplyDeleteलाजवाब
ReplyDeleteआपने सीधे सवाल दागे हैं और घुमा-फिरा कर बात नहीं की, यही बात असर छोड़ती है। “व्हिस्की के पैग” वाला रूपक पूरी राजनीति की हालत खोल देता है। आपने कानून पर ही नहीं, नीयत पर भी उंगली रखी है।
ReplyDelete